बिहार : नियोजित शिक्षकों की हड़ताल 60वें दिन में पहुंची, अब तक 60 की मौत

April 24, 2020
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पटना : कोरोना महामारी के बीच अपनी मांगों को लेकर बीते 2 माह से हड़ताल कर रहे बिहार के नियोजित शिक्षक लगातार काल के गाल में समा रहे हैं. गुरुवार को सूबे के विभिन्न जिलों में कार्यरत चार हड़ताली शिक्षकों की मौत हो गई. इसके साथ ही हड़ताल की अवधि में जान गंवाने वाले नियोजित शिक्षकों की संख्या 60 हो गयी है. बता दें कि शुक्रवार 24 अप्रैल को यह हड़ताल भी अपने 60वें दिन में प्रवेश कर गया है.

बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रवक्ता अभिषेक कुमार के अनुसार बीते बुधवार और गुरुवार को दो-दो शिक्षकों की मौत की जानकारी मिली है. इनमें बुधवार को बच्चा पंडित (प्रभारी प्रधानाध्यापक, मध्य विद्यालय रामपुर, प्रखंड - बगहा-2, प.चम्पारण) और अनीता कुमारी (प्रखंड शिक्षिका, म.वि. नहरी, प्रखंड - खुटौना, मधुबनी) की जबकि गुरुवार को मो. शमीम अख्तर (प्रखंड शिक्षक, म. वि. बनियापट्टी, प्रखंड - के. नगर, पूर्णिया) और हीरालाल राम (प्रखंड शिक्षक, म. वि. जाफरपुर, प्रखंड - बरबीघा, शेखपुरा) की मौत हो गयी है.

बिहार के शिक्षकों की जान ले रहा हड़ताल, अब तक 52 की मौत

इस मामले में संघ के संयुक्त सचिव डॉ. सुरेश प्रसाद राय ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से अविलंब हस्तक्षेप कर इस अनिश्चितकालीन हड़ताल को ख़त्म कराने की मांग की है. उन्होंने कहा कि कोरोना की मार से बचने के लिए विभिन्न प्रकार के पेंशनभोगियों सहित संविदा कर्मियों के प्रति सरकार ने संजीदगी दिखाई है, लेकिन प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर तक के शिक्षक सरकार की बेरुखी के शिकार हैं. हड़ताल के दौरान अब तक 60 शिक्षक/शिक्षिकाओं की असामयिक मृत्यु हो चुकी है जबकि 30 हजार से भी अधिक हड़ताली शिक्षक बर्खास्तगी, निलंबन और प्राथमिकी जैसी कार्रवाई का दंश झेल रहे हैं.

इससे पहले संघ के महासचिव सह पूर्व सांसद शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने इन मौतों को शिक्षक आंदोलन इतिहास की अब तक का सबसे बड़ी त्रासदी बताया था. उनका कहना था कि लगातार प्रताड़ना के कारण अधिकांश शिक्षक हार्ट अटैक, ब्रेन हेमरेज तथा पैसे के अभाव में इलाज न कराने के कारण असमय काल के गाल में समा गए हैं.

इधर बिहार के हड़ताली शिक्षकों ने शिक्षक निर्वाचन तथा स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के प्रतिनिधियों को चेतावनी भी दी है. इस बारे में टीइटी एसटीइटी उत्तीर्ण नियोजित शिक्षक संघ के प्रदेश प्रवक्ता अश्विनी पाण्डेय ने कहा है कि अगर शिक्षकों की मांगों के समर्थन में सत्ता-विपक्ष के विधानपार्षद सरकार पर दवाब नही बना सकते, शिक्षकों पर दमन और उनकी हकमारी के खिलाफ लड़ नही सकते, तो उन्हें अपने पद पर बने रहने का हक नही है. तमाम विधानपार्षदों को अविलंब इस्तीफा देना चाहिए.

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