लापरवाह सरकार, MP से 11 दिन पैदल चलकर पटना पहुंची मजदूरों की टोली, लेकिन बिहार में नहीं हुई कोई जांच

April 28, 2020
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Patna: बिहार सरकार कोरोना से लड़ने के लिए लॉकडाउन के प्रावधानों को सख्ती से पालन करने का दावा करती है. पर आज भी लोग परेशान हालात में अपने घर के लिए पैदल ही निकल रहे हैं. लॉकडाउन के एक महीने बीतने के बाद सोमवार को ऐसे ही मजदूरों की टोली मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) से पैदल चलती हुई पटना पहुंची. दो दर्जन से ज्यादा मजदूर पैदल ही मध्य प्रदेश के मुरैना से चलते हुए पटना पहुंचे और यहां से दरभंगा (Darbhanga) के लिए रवाना हुए.

मध्य प्रदेश के मुरैना से सभी मजदूर 11 दिन पहले पैदल निकले थे. 11 दिनों तक पैदल चलने के बाद वे सोमवार को पटना के NH 30 से गुजरते हुए दरभंगा के लिए निकल गए. मजदूरों ने न्यूज 18 से बात करते हुए अपनी बेबसी बयां की. मजदूर सुंदर चौपाल ने कहा कि लॉकडाउन के कारण काम धंधे पूरी तरह से बंद हैं. जिस कंपनी में काम करते थे उसने कहा दिया है कि अब रहने की भी व्यवस्था नहीं. साथ में आ रहे मजदूर गगन यादव ने बताया कि काम बंद होने के बाद कुछ दिन तो बचे पैसे के सहारे रहे पर जब पैसे खत्म होने लगे तो घर वापसी के अलावा कोई चारा नहीं बचा. NH 30 पर बक्सर से आ रहे लोगों की भीड़ भी दिखाई पड़ी. बक्सर से आधे दर्जन लोग तीन दिन से पैदल चलते हुए पटना पहुचे, ये मुजफ्फरपुर के लिए रवाना हुए.

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लॉकडाउन में बिहार सरकार सख्ती की बात कह रही है पर दावे पर सवाल खड़े हो रहा है. मुरैना से पैदल आ रहे मजदूरों का कहना है कि मध्य प्रदेश में एक जगह स्क्रीनिंग की गई पर बिहार घुसने के बाद कहीं किसी ने कोई जांच नहीं की. लोगों का कहना है अगर प्रशासन क्वारंटीन में रहने को कहेगी तो जरूर रहेंगे. बाहर में फंसे मजदूरों को मदद के लिए बिहार सरकार ने कई कदम उठाए हैं. लोगो के खातों में एक-एक हजार रुपये और खाने को राशन भी मुहैया कराया जा रहा है. पर मध्य प्रदेश से लौटे मजदूर गोपाल यादव का कहना है कि अभी तक कोई सरकारी सहायता नहीं मिली. किसी को कुछ पता भी नहीं है कि सहायता किसे और कैसे मिल रही है.

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