कोटा में फंसे बिहार के बच्चों को लाने के लिए सरकार ने दिया पैंतरा, तो पप्पू यादव ने मारी बाजी, जानें कैसे

April 30, 2020
सियासत
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Patna: कोरोना वायरस और लॉकडाउन के कारण राजस्थान के कोटा में फंसे बिहार के बच्चों को लेकर राजनीति थमने का नाम नहीं ले रही है. इस कड़ी में एक तरफ जहां बिहार सरकार कोटा में फंसे बच्चों को लेकर पैंतरा दे रही है तो वहीं दूसरी ओर इस कड़ी में पूर्व सांसद और जन अधिकार पार्टी के नेता पप्पू यादव (Pappu Yadav) ने वहां से बच्चों को निकालने के लिए 30 बसें भेजी हैं. पूर्व सांसद पप्पू यादव ने कहा कि मेरी कोटा के कलेक्टर और राजस्थान के मुख्यमंत्री के सचिव से बात हुई है, लेकिन उनका कहना है कि कम से कम 250 बसें भेजें तब जाकर हम बिहार के बच्चों को भेजेंगे.

पप्पू यादव के मुताबिक, उन्होंने कोटा के प्रशासनिक अधिकारियों से कहा कि पहले बच्चियों को कोटा से बाहर निकालें और उनके घरों तक भेजें. लेकिन उनका कहना है कि कम से कम 100 बसें भेजने पर ही हम बच्चियों को यहां से भेज सकेंगे.

पप्पू यादव ने ट्वीट में लिखा है कि बिहार सरकार के पास धन नहीं है, मैं तन-मन-धन से हर बिहारी को बिहार लाने को प्रतिबद्ध हूं। कोटा से छात्रों को लाने हेतु वहां 30 बस लगवा दिया है। राजस्थान के मुख्यमंत्री @ashokgehlot51 जी से आग्रह है कि वह बस सेनेटाइज करवा कर, छात्रों की सुरक्षित यात्रा का इंतज़ाम सुनिश्चित कराएं।

पप्पू यादव के मुताबिक, बिहार सरकार से पप्पू ने कहा कि बिहार सरकार अपनी सभी 600 बसों को कोटा भेजे ताकि वहां फंसे बच्चों को वापस लाया जा सके. इस दौरान पप्पू ने यह भी कहा कि बिहार में कुर्सी पर बैठे लोग सत्ता में रहने लायक नहीं हैं. पप्पू यादव ने बताया कि बिहार सरकार के पास धन नहीं है, मैं तन-मन-धन से हर बिहारी को बिहार लाने को प्रतिबद्ध हूं.



केंद्र सरकार की तरफ से लॉकडाउन में अलग-अलग जगहों पर फंसे लोगों को वापस लाने के लिए हरी झंडी मिल गई है. लेकिन केंद्र के इस फैसले के बीच बिहार सरकार को इस बात की चिंता हो गई कि आखिर कैसे दूर-दराज के लोगों को वापस बुलाया जाए. मुंबई, गुजरात, हरियाणा तमाम जगहों से छात्र और प्रवासी मजदूरों को किन साधनों से वापस बुलाया जाए? इसको लेकर बिहार सरकार ने अब केंद्र सरकार से नॉनस्टॉप ट्रेन चलाने की मांग की है.

बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि बसों से छात्रों और प्रवासी मजदूरों को वापस बुलाना व्यावहारिक नहीं लगता है क्योंकि बस से छह से सात दिन का समय लग सकता है. यह व्यवहारिक नहीं जान पड़ता है इसलिए केंद्र सरकार ऐसी ट्रेन की व्यवस्था करे जो सीधे एक जगह से दूसरी जगह ही रुके और प्रवासी मजदूर और छात्र उससे वापस बिहार लौट जाएं. सुशील मोदी ने यह भी कहा कि ट्रेनों पर छात्रों के खाने-पीने की व्यवस्था हो ताकि उनकी यात्रा ठीक से हो जाए.

बिहार सरकार के मुताबिक 27 लाख से ज्यादा लोगों ने आपदा अनुदान की राशि का आवेदन दिया है. ऐसे हालात में बिहार सरकार यह समझ रही है कि 27 लाख से ज्यादा लोग बिहार से बाहर फंसे हुए हैं और वो सभी वापस बिहार आना चाहते हैं. ऐसे में सुशील मोदी ने कहा कि इतने सारे लोगों के लिए बस चलाना संभव नहीं हो पाएगा. उनके लिए ट्रेनों की जरूरत पड़ेगी और यह ट्रेन नॉनस्टॉप एक जगह से दूसरी जगह जाएगी. बाकी जो लोग आसपास के राज्यों में फंसे हैं उनको बस से लाया जा सकता है.

बिहार सरकार के मुताबिक दिल्ली से पांच लाख से ज्यादा लोगों ने, महाराष्ट्र से दो लाख 68 हजार लोगों ने, कर्नाटक से एक लाख से ज्यादा लोगों ने और गुजरात के सूरत से लेकर पोरबंदर तक के लोगों ने भी आपदा अनुदान राशि के लिए आवेदन दिया है.

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