खुद के भाग्य पर रोने वाले मजदूर बिहार में किस सियासी दल की किस्मत चमकाने वाले हैं?

May 25, 2020
जिलाटॉप
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Patna: तुम पर पड़ी नजर कि सब लट्टू हो गए। हर कोई दरभंगा की बहादुर बिटिया ज्योति की मदद में जुटा है। मंत्री, नेता, संगठन सब एक ही साथ मदद कर देने की कतार में लगे हुए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी तो ज्योति की पढ़ाई का खर्चा उठाएगी, शादी करवाने का वादा भी कर डाली हैं। आर्थिक मदद और ज्योति के पिता को नौकरी का भी भरोसा दिया है। लेकिन कहां, कैसे नौकरी देंगी ? सरकार में आएंगी तो यह वादा शायद पूरा हो जाए लेकिन तब तक क्या ? या फिर मजदूरों को जो नौकरी मिलती है उससे ही ज्योति के पिता भी घर चलाएंगे?

यहां से अब राजनीतिक रंग जमी हुई दिखाई दे रही है। लाखों मजदूरों को अपना बना लेने की मुहिम छिड़ गई है। बिहार के मुखिया नीतीश कुमार तो कहवा दिए नून रोटी खाएंगे बिहार में ही रह जाएंगे ठीक है। उन्होंने भी सबको रोजगार देने का वादा किया है, लेकिन कैसे,कब तक ?

अगर सरकार के पास इतना स्रोत था तो अब तक बिहार में रोजगार क्यों नहीं थे ? पैसे क्यों नहीं थे ? क्या बिना उद्योग लगाए 50 लाख मजदूरों को नीतीश कुमार काम दे देंगे ? क्या यह चुनावी स्टंट नहीं है ?

वहीं मजदूरों को पार्टी में जोड़ने की बात कहने वाले राजद भूखों को खिलाने पिलाने में लगे हैे, आरोप गढ़ने में लगे हैं, हमला कर रहे हैं, बावजूद इसके नीतीश कुमार का वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए क्वारंटीन सेंटर में लोगों से जुड़ना तेजस्वी से एक कदम आगे की सोच है।

अब इसे तेजस्वी यादव भी अपनाने में जुटे हैं, जहां कल ज्योति और उसके परिवार से बात कर इसकी शुरुआत कर दी है।

लेकिन इन सबके बीच वोट बैंक को किनारे कर दें तो इससे मजदूरों का कितना भला होना है? बिहार की जमीनी सच्चाई क्या है? नीतीश कुमार का प्लान कितना कामयाब होगा? क्या तेजस्वी यादव सिर्फ अपने प्लानिंग में बदलाव करते रहेंगे या अटैकिंग पॉलिटिक्स से उन्हें मंजिल मिल जाएगी ? चुनाव तो होना ही है चाहे थोड़ी देर से हो तो तैयारी में कोई कमी छोड़ भी नहीं रहा। धीरे धीरे यह तस्वीर भी साफ हो जाएगी कि खुद अपने भाग्य पर रोने वाले मजदूर किसकी किस्मत चमकाते हैं?

By: Ranjit Jha

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