शिक्षकों को आकर्षक, सम्मानजनक तथा गरिमापूर्ण वेतनमान के बिना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा बेमानी : अभिषेक

July 31, 2020
जिलाटॉप
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बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रवक्ता अभिषेक कुमार ने सरकार की नई शिक्षा नीति के हवाले से कहा कि इस नीति में शिक्षामित्र, पारा शिक्षक, संविदा शिक्षक अथवा कम वेतन पर नियोजन या नियुक्ति नहीं करने की बात कही गई है मगर बिहार में अल्प वेतन पर नियोजित शिक्षकों से न सिर्फ काम लिया जा रहा है बल्कि नियोजन भी बदस्तूर जारी है। सरकार को नियोजन के आधार व अल्प वेतन पर शिक्षकों की नियुक्ति पर तात्कालिक प्रभाव से रोक लगानी चाहिए और नियमित वेतनमान पर योग्य एवं कुशल शिक्षक की नियुक्ति की प्रक्रिया प्रारंभ की जानी चाहिए ।

शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्य से किया जाए मुक्त

उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के प्रावधान के अनुसार शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्य से पुरी तरह मुक्त की जानी चाहिए।

अभिषेक ने कहा कि शिक्षा नीति में स्पष्ट है कि जब तक शिक्षकों का आकर्षक, सम्मानजनक तथा गरिमापूर्ण वेतनमान नहीं होगा तब तक शिक्षा में गुणात्मक विकास असंभव है।

पंचायती राज से शिक्षा मुक्त करना अच्छी बात

बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रवक्ता अभिषेक कुमार ने कहा कि शिक्षा को पंचायती राज से मुक्त करने तथा माध्यमिक विद्यालयों के बच्चों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (ए) के तहत शिक्षा का मौलिक अध्किार प्रदान किया गया है जो बेहतर और स्वागत योग्य कदम है।

जीडीपी का दस प्रतिशत शिक्षा पर किया जाए खर्च

उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में शिक्षा पर जीडीपी का छह प्रतिशत तक खर्च करने की बात कही गई है मगर वर्तमान परिवेश में दस प्रतिशत खर्च होना चाहिए। जिसमें पिछड़े राज्यों को ज्यादा से ज्यादा सहायता मिलती और ना सिर्फ वहां के साधन संसाधन विकसित होते बल्कि समान रूप की शिक्षा कायम करने की घोषणा भी सही मायने में सफलीभूत होती।

उन्होंने कहा कि समान व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने हेतु पड़ोस पद्धति के माध्यम की बात कही गयी है। जिससे स्पष्ट है कि शिक्षा व विद्यालयों की जरूरतों को नजरअंदाज किया गया है। ऐसा न हो कि मात्रात्मक शिक्षा का विकास हो मगर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का विकास एक बार फिर सपना ही रह जाए।

शिक्षकों के वेतन से संबंधित मामले पर शिक्षा नीति चुप

उन्होंने कहा कि बेहतर समाज के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका अहम है और समाज में शिक्षकों के उत्थान व सम्मान के बिना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात बेमानी है। नई शिक्षा नीति में शिक्षकों, अध्यापकों के लिए अर्हता व चयन की प्रक्रिया काफी कठिन करने की बात जरूर की गई है मगर उनके वेतन पर स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। इसीलिए पूरी दुनिया में अपने बेहतर शिक्षा के लिए मशहूर स्वीडन व फिनलैंड की तरह ही शिक्षकों को वेतन संरचना तथा वही सम्मान अपने देश में लागू किया जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि देश में अभी शिक्षा पर जीडीपी का लगभग तीन प्रतिशत ही खर्च हो पाता है इससे पता चलता है कि सरकार शिक्षा के प्रति कितनी गंभीर है और शिक्षा सरकार की प्राथमिकता में नहीं है।

निजी विद्यालयों की फीस व संचालन की मनमानी पर नहीं लगी है रोक

उन्होंने कहा कि शिक्षा नीति में अभी जीडीपी का छह प्रतिशत खर्च करने की बात कही गई है मगर कोठारी आयोग ने 60 के दशक में ही जीडीपी का छह प्रतिशत शिक्षा पर खर्च करने की बात कही थी जो आज बढ़ कर कई गुणा ज्यादा होना चाहिए था। भूटान जैसे देश में भी आज जीडीपी का सात प्रतिशत शिक्षा पर खर्च होता है।

उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में निजी विद्यालयों की फीस व संचालन की स्वतंत्रता की बात कही गई है जो एक बार फिर समाज में शिक्षा की असमानता पैदा करेगा।

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