पटना हाईकोर्ट ने राज्य की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर की टिप्पणी, कहा- ये खुद गंभीर समस्या से ग्रसित

January 17, 2020
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PATNA:नीतीश सरकारी की स्वास्थ्य सेवाओं की हालत पर पटना हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि यहां के अफसर तो सरकारी खर्चे पर बाहर जाकर अपना दुरुस्त इलाज करा लेते हैं, मगर गरीबों की फिक्र कितनी है? अगर हालत नहीं सुधरे, तो हम सरकारी मुलाजिमों के मेडिकल री-इम्बर्समेंट पर रोक लगा देंगे.

पटना हाईकोर्ट ने सरकारी मुलाजिमों पर सख्ती बरतते हुए कहा कि यहां के अफसर, यहां की स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली के चलते ही बिहार से बाहर जाकर इलाज कराते हैं, जबकि दूसरे राज्यों में बड़े अफसर से लेकर चपरासी तक अपना इलाज वहां के सरकारी अस्पताल में कराते हैं. कोर्ट के मुताबिक यहां की सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं खुद गंभीर समस्या से ग्रसित हैं. गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश संजय करोल व न्यायमूर्ति डॉ. अनिल कुमार उपाध्याय की खंडपीठ विकास चंद्र उर्फ गुड्डू बाबा की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी. कोर्ट रूम में स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार भी मौजूद थे.



तो वहीं इस पर खंडपीठ ने कहा कि हाईकोर्ट सरकार नहीं चला सकता, लेकिन सूबे के 13 करोड़ लोगों के स्वस्थ जीवन जीने के मौलिक अधिकार पर आंख नहीं मूंद सकता. सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर इस कोर्ट में कई PIL लंबित हैं. डॉक्टरों व पारा मेडिकल कर्मी की घोर कमी है. औसतन 30 फीसदी डॉक्टर व मेडिकल कर्मियों पर सरकारी अस्पताल चल रहे हैं. इंफ्रास्ट्रक्चर खराब है. गरीबों को बंटने वाली दवाओं का अभाव है. प्रतिबंधित दवाएं बिक रही हैं. हम इन सभी मुद्दों से जुड़ी तमाम याचिकाओं को 23 जनवरी को एकसाथ सुनेंगे. ऐसा प्रतीत होता है कि प्रधान सचिव समस्याओं को खत्म करने को लेकर गम्भीर कार्य करना चाहते हैं. लेकिन कर नहीं पा रहे, क्योंकि इनके हाथ बंधे हैं.

इसके साथ ही कोर्ट ने प्रधान सचिव से पूछा कि अमीर मरीजों के लिए तो बड़े प्राइवेट अस्पताल हैं लेकिन गरीबों की सुध सरकार कितनी लेती है? गरीबों की फिक्र कौन करेगा? कोर्ट ने मुख्य सचिव, स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को महाधिवक्ता के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर फौरन सुधार का उपाय करने को कहा. 23 जनवरी को कार्रवाई रिपोर्ट पेश करनी होगी. याचिका में छह सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों की जमीन पर अवैध अतिक्रमण की खासी चर्चा है. कोर्ट का कहना था कि सुधार के लिए होने वाली बैठक में मुख्य सचिव, स्वास्थ्य तथा अन्य संबंधित विभागों के प्रधान सचिव के अलावा सभी छह मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के प्राचार्य, अधीक्षक व संबंधित जिलों के डीएम भी रहें. अगली सुनवाई 23 जनवरी को होगी.

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