बिहार के किसानों के लिए वरदान है बजट 2020, ट्रेनों से फल, सब्जी बाहर ले जाने से बढ़ेगी आमदनी

February 2, 2020
जिलाटॉप
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PATNA: भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को आम बजट पेश किया. इस दौरान उन्होंने खेतीबारी और सिंचाई के लिए 1.60 लाख करोड़ रुपये देने का ऐलान किया. राज्यों को अलग से योजनाएं तो नहीं दी गई है लेकिन समग्र योजना में कई बिहार के लिए लाभदायक साबित होंगी.

दरसल सरकार ने किसानों के उत्पाद का उचित मूल्य दिलाने के लिए निर्यात की व्यवस्था को बढ़ावा देने की योजना बनाई है. इसके तहत उड़ान योजना शुरू की जाएगी. एयर कार्गो नहीं होने से इस योजना का लाभ तो बिहार को नहीं मिल पाएगा लेकिन देश के भीतर कृषि उत्पादों के लिए चलाई जाने वाली विशेष ट्रेनों के माध्यम से किसान फल व सब्जियों को राज्य के बाहर भेजकर अच्छी आमदनी कमा सकते हैं. इसके अलावा सरकार ने अन्य ट्रेनों में भी फल-सब्जियों की ढुलाई के लिए विशेष बोगी (कोल्ड चेन) लगाने का निर्णय लिया है. जैविक खेती पोर्टल बनाकर जैविक उत्पादों के ऑनलाइन राष्ट्रीय बाजार देने की केन्द्र की योजना से भी बिहार के किसानों को लाभ होगा.

आपको बता दें कि सब्जियों के उत्पादन में बिहार का स्थान तीसरा है. बिहार कुल खपत का 8.6 प्रतिशत सब्जियों का उत्पादन करता है. ऐसे में राज्य सरकार की मंशा है कि सब्जी उत्पादन में देश को पहले नम्बर पर ले जाने की. इसके तहत जैविक कॉरिडोर बनाकर जैविक सब्जी का उत्पादन बढ़ाने की व्यवस्था है. केन्द्र की इस नई योजना से ऐसे किसानों को अधिक लाभ होगा. ट्रेनों के माध्यम से फल और सब्जियों को बाहर ले जाया जा सकेगा.



तो वहीं केन्द्र ने जल की कमी वाले सौ जिलों में सिंचाई की बड़ी योजना शुरू करने का प्रस्ताव बजट में किया है. राज्य के 17 जिले अभी इस संकट से गुजरते हैं. उन जिलों में सरकार जलछाजन योजना चला रही है. लेकिन अगर बिहार के इन जिलों का चुनाव केन्द्र की योजना के लिए होता है तो किसानों को काफी लाभ होगा. राज्य के गया, नवादा, रोहतास, कैमूर, जमुई, भोजपुर, लखीसराय, मुंगेर, बांका, नालंदा, बक्सर, शेखपुरा, भागलपुर, पटना, जहानाबाद, और अरवल जिलों में जलछाजन योजनाएं चलती हैं. इनमें से कुछ जिलों का चयन अगर देश के उन सौ जिलों में हो, जहां बड़ी सिंचाई योजनाएं लगाई जानी हैं, तो किसानों को लाभ होगा.

इसके अलावा केन्द्र सरकार ने अपने बजट में नए जलस्रोत बनाने के अलावा पुराने जलस्रोतों की जीर्णोद्धार का प्रस्ताव किया है. लेकिन राज्य सरकार ने इस योजना पर पहले से ही काम शुरू कर दिया है. जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत सभी आहर पइन का जीर्णोद्धार करने का काम चल रहा है. साथ ही नए आहर पइन बनाने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है. केन्द्र की योजना से इसके तहत पैसा मिले तो राज्य सरकार की इस योजना की गति और तेज होगी. लघु जल संसाधन विभाग ने अब तक राज्य में चार हजार 55 आहर पइन को चिह्नित किया है. अब तक लगभग एक हजार ऐसे जलस्रोतों का जीर्णोद्धार पूरा कर लिया गया है.

साथ ही केन्द्र ने एक जिला एक फसल की योजना दी है. बिहार सरकार दो वर्षों से इस योजना पर काम कर रही है. सरकार सभी जिलों के लिए एक विशेष फसल का चयन कर उसकी खेती को प्रोत्साहित कर रही है. इसके लिए किसानों को अनुदान देने की भी व्यवस्था राज्य सरकार ने की है. केन्द्र ने इसके लिए बाजार और निर्यात की व्यवस्था की बात कही है. अगर इन फसलों के लिए बाजार की व्यवस्था हो जाए तो योजना के प्रति किसानों की रुचि बढ़ेगी. साथ ही व्यापरियों को भी एक फसल के लिए कई जिले के किसानों से संपर्क करने की जरूरत नहीं होगी.

देश में ऐसे जिलों की पहचान उस विशेष फसल के उत्पादक के रूप में बन जाएगी और देशभर के व्यापारी वहां पहुंच सकेंगे. सरकार ने नालंदा के लिए आलू, वैशाली के लिए मधु, रोहतास के लिए टमाटर, समस्तीपुर और अररिया के लिए हरी मिर्च, पूर्वी चम्परण के लिए लहसुन, भोजपुर के लिए मटर, बक्सर और शेखपुरा के लिए प्याज की खेती का चयन किया है.

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